Ravi Beck (Prem)
एक नया आसमान
Page
मुखपृष्ठ
About me
Google +
मेरे बारे में
Unknown
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Popular Posts
जिन्दगी क्या है?
संतुष्ट
पिया मिलन की रात
सोच किस तेज़ी से बढ़ रही है
बस उसे ही देखते रहे
"गन्दगी में रहना कौन चाहता है"
आखिरी खत
प्रयास
इक अमर प्रेम की दास्तान
इश्क का गीत
यह ब्लॉग खोजें
गुरुवार, 31 मई 2012
बस उसे ही देखते रहे
भरी महफ़िल में नज़रें चुरा कर बस उसे ही देखते रहे
चुपके से अगर नज़रें मिल जाये तो
दिल की ख़ुशी लफ़्ज़ों में बयां नहीं हो रहे है
हालात की कसमकस में आज तूफान भी आये तो डर नहीं
अब तो बस उसकी ही तस्वीर मेरे दिलो-दिमाक में बस गयी है
आगे पढने के लिए यहाँ क्लिक करे »
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)