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गुरुवार, 8 मार्च 2012

आखिरी खत

प्रिय अनमोल,                                                                                   ८/3/२०१२ 
 माँ का ह्रदय तो ऐसे भी कोमल होता है  
                     आशा है कि आप सब लोग सकुशल होगे. आपको पत्र लिखे २०-२२ दिन हो गए. ये मेरी जिंदगी का आखिरी ख़त होगा. लिखना तो नहीं चाहती थी पर
अंतिम साँस तक हर बात बताने का वादा जो किया था इसलिए बताउंगी और आपसे पूछूंगी भी. वैसे अब तो आपकी शादी हो गई होगी. अत: आप हमें क्यों बतायंगे . संभवत आपको मेरा १६/२/२०१२ का पत्र भी मिला होगा यह बात सदा आपसे मेरी आत्मा पूछेगी की जब भाई साहब जी मान सकते थे, तो माँ कैसे नहीं मानी?

माँ का ह्रदय तो ऐसे भी कोमल होता है. पर क्या कहे आपकी  माँ अपवाद थी.पता नहीं क्यों  आपकी  माँ ने ऐसे किया. आज सोचती  हूँ 

काश हम भी भाग कर ही शादी कर लेते ...........
क्या हम इसके बाद माँ को नहीं मना लेते  लेते....

ये सच है की माँ हम दोनों का साथ नहीं पसंद करती थी पर वो तो एक नारी थी तो फिर कैसे एक नारी का दुःख नहीं समझ सकी मुझे विश्वास नहीं होता. हम दोनों के प्यार के बीच में तुम्हारी माँ की भूमिका इस कदर हावी होगी ये  कभी   नहीं सोची थी. इतनी कोशिश के बावजूद आपकी माँ ने जाने क्यों मुझे कभी समझने की कोशिश नहीं की. तुम्हारी माँ की डांट मिलने के बावजूद मैं उन्हें मनाने में विश्वास करती थी. 

ये सच है की मैंने ही तुम्हे तुम्हारे परिवार के विरुद्ध नहीं जाने को कहा था  आपने दिल में पत्थर रख कर मैंने ये फैसला किया था हम भाग का भी शादी  कर सकते थे पर मैंने तुम्हे ऐसा करने से रोका.

आपकी माँ को देखने से मुझे अपनी  माँ की याद आती थी  तो फिर कैसे अपनी माँ को दुःख पहुंचा सकती थी सो उस दिन मैंने आपको कसम दे कर किसी और से शादी के लिए मजबूर कर दिया... आप मेरी बातों को समझने की कोशिश कीजियेगा   

क्या- क्या ख्याब संजोए थे हमने
आज जब  आपकी  शादी हो गयी होगी मैं अपने दिल को कैसे मनाऊ यह भी सच है की मैं अपने को समझाने की बहुत कोशिश की, अपने भावनाओं के बहाव को तर्कों के बांध से बंधने का प्रयत्न किया . लेकिन मेरा दर्द क्षण-क्षण मेरी आँखों से टपक पड़ता है तो मैं क्या करूँ .क्या- क्या ख्याब संजोए थे हमने सब धुल गए....

ये मेरे मस्तिष्क का द्वन्द ही हो सकता है . अत: आप परेशान न होना, मैं अपनी जिंदगी का जैसे भी अंत करुँगी उसमे आपका कोई  दोष नहीं है मेरी तपस्या अधूरी है तभी तो इतने दिनों की मेरी पुकार को आप टुकरा दे रहे है असलियत तो यह है कि आप मुझे ही पूरी तरह से पसंद नहीं करते थे ...माफ़ करना. क्या करूँ दोष लगाना नहीं चाहती हूँ पर  आपकी  याद आने पर जाने मुझे क्या हो जाता है ....

अब कभी आपकी जिंदगी के राहों में नहीं आउंगी मैं यहाँ से बहुत दूर चली जा रही हूँ और कभी वापस नहीं आउंगी ... 
आज के बाद कभी आप मेरे ख़त का इंतज़ार मत करिएगा....


आप  जानते है  कि मैं किसी तरह अपने आप को संभल ही लूंगी. तो ये सच ही है मैं एक  शिक्षित और समझदार लड़की हूँ सो ये मत सोचना कि मैं टूट जाउंगी मैं ऐसा वैसा कुछ नहीं करने वाली, अपने जीवन को नष्ट नहीं होने दूंगी 

मैं अच्छी नौकरी की तलाश करुँगी और मुझे विश्वास है अब मैं कभी असफल नहीं होंगी, 
हर राह पे अब अपने विवेक और समझ से काम लूंगी ताकि 
फिर से कभी इस तरह कि परेशानी नहीं उठाना पड़े 

अपने जीवन को गरीब बच्चों के नाम कर दूंगी 
उनके लिए स्कूल खोलने और लड़की बच्चों के लिए छात्रवास खोलने की 
जो सपने  हम दोनों ने साथ मिल कर देखे थे 
 इसे पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दूंगी ये सच है कि 
अब  आपका  साथ नहीं है पर मैं इसे जरुर पूरा करुँगी यही अब  मेरे जीवन का लक्ष्य है

मेरा मन अब फिर से आत्मविश्वास से पूर्ण हो गया है 
मुझे किसी ने नहीं समझाया और न सहारा दिया 
मैं अपने मन के विश्वास से ये सारे निर्णय ले रही हूँ 
मेरे बारे में जानने का आपको पूरा हक़ है 
पर आज से मैं अपने को हर तरह के  दुख देने वाले  बंधन से आजाद करती हूँ

मैं अब जीना सीख चुकी हूँ
मुझे अब नहीं टुकडो में मरना, 
ग़मों के सागर में नहीं तैरना, 
दुखों के पहाड़ो में नहीं  चढ़ना  
अब और नहीं भटकना, 
अब मेरी आंखे नम कभी नहीं होगी , 
किसी की याद में अब कभी नहीं तडपेगी, 
आपसे  मिलने को नहीं तरसेगी.
अपनी राह खुद बनाउंगी अपनी माँ के सिखाये कर्त्तव्यों को अपने जीवन में लागू  करुँगी. 
अपनी जीवन को अपने  सिद्धांतों  में जीना चाहती हूँ 
मेरी ख़ामोशी अब मेरी कमजोरी नहीं रह गई है 
मैं गिरकर उठना जान गई हूँ 
अब मेरी जिंदगी हँसने खिलखिलाने की है 
दुसरो का दर्द को कम करने की है 
रोने रुलाने की नहीं
बस आप से इतना ही कहना चाहती हूँ कि 
मैं अब जीना सीख चुकी हूँ

                                                                                       सिर्फ आपकी 
                                                                                        निशा   



(नारी संघर्ष की एक दास्तान )
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर  पर सभी नारी समाज को हार्दिक शुभकामनायें 

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