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रविवार, 24 फ़रवरी 2013

मैं भी बदल...

अतीत की बातें और भविष्य की कल्पनाओं में डूबा शामो सवेरे
इस कदर खोया रहा मानो जीवन सिर्फ गमो से भरा हो
रास्ते में मैं जब उसके चेहरे के भाव पढने की चेष्टा करता हूँ
तो आत्म ग्लानी के भाव दीख पड़ते है
शहर में बस अब उनकी यादें ही रह गई है

कितनी ख़ुशी से गुजर रहे थे वो दिन आज बस यादें ही है
मिल कर तो कितनी प्रसन्नता होती है लेकिन साथ बिताये पलों की याद कर
आंखें बस नम हो जाती है कितनी नजदीकियां हुआ करती थी, बातों का सिलसिला
थमने का नाम नहीं लेती थी
समय के साथ हालात और लोग भी बदल जाते है तो मैं क्या चीज़ था मैं भी
बदल......///w\\\

रविवार, 10 फ़रवरी 2013

नई सुबह की आस में


नई बहार नई चाहत 
नई जिंदगी की आस में

नई आशा नई किरण
नई सुबह की आस में 

अब शायद सो भी नहीं पायेगी  
इस अँधेरी रात में

आधी बातें..



कितना बदल गया रे आज  समाज 
भाग दौड़ और आगे रहने की रेस में सब है आगे...
पर कौन पिछड़ गया रे आज...?

इस इंसान को इंसान ने ही हरा दिया
जो इंसान होके भी इंसानियत की सोच तक को भूला गया

आज की ये जिन्दगी कल की उधार है
तो फिर क्यों ना हम एक बार
कल की जिन्दगी के बारे में सोच लें...

बहते खुशी के लम्हों में
क्यों ना हम अपनों के दुःखों को भी आज बहा दें...

आपसी प्यार-मिलाप और सहयोग से
क्यों ना हम बैर- घृणा और कपट को आज मिटा देँ...

छूट रहे हाथों को मजबूती से पकड़ क्योँ ना.....

आधी बातें....

क्योँ ना पूरी करें .....