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बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

सोच किस तेज़ी से बढ़ रही है

क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है ?
सोच किस तेज़ी से बढ़ रही है
अमीर -  गरीब  और ये सरकारी नीति
आज ये मुद्दा नहीं कि  मुद्रास्फीति की दर किस तेज़ी से बढ़ रही या घट रही है? 
या फिर सरकार क्यों महंगाई बढ़ा रही है? 
मुद्दा ये है कि सोच किस तेज़ी से बढ़ रही है और बदल रही है

गुरुवार, 16 अगस्त 2012

प्यारा है मिलन

प्यारा-सा है  मिलन 

मिलने पर भी लगता है 
मिलन अभी आधा अधूरा  है 
 बुलाये हो मिलने को पर 
जब मिल जाते हो तुम 
लौटने का वक़्त भी  भूल जाते है हम

बुधवार, 1 अगस्त 2012

"गन्दगी में रहना कौन चाहता है"


भोली सुरत पर! मुरझाए से चेहरे लिए आँखों में दर्द के बिताए पलों के नमी लिए गँदे पुराने कपड़े में एक नन्ही सी जिन्दगी आशा से हाथों को फैलाए कि कुछ मिल जाए, स्टेशन पर  इधर - उधर घूम  रही थी
पास आने पर 5 का सिक्का देने पर माँ से भी बड़ी बड़ी आर्शीवाद के वचनों की बोली बोल कर आगे बढ़ गयी.....

बुधवार, 11 जुलाई 2012

उनके आने से


खिलती बहारों  के  मौसम में  
मन क्यों आज बहक रहा है
उनके आने से 
इस बिराने में
उनके आने से
दिल के कोने में

गुरुवार, 31 मई 2012

बस उसे ही देखते रहे

बस उसे ही देखते रहे
भरी महफ़िल में नज़रें चुरा कर बस उसे ही देखते रहे
चुपके से अगर नज़रें मिल जाये तो 
दिल की ख़ुशी लफ़्ज़ों में बयां नहीं हो रहे है
हालात की कसमकस में आज  तूफान भी आये तो डर नहीं
अब तो बस उसकी ही तस्वीर मेरे दिलो-दिमाक में बस गयी है

बुधवार, 21 मार्च 2012

उनका साथ


जीवन की राह पे उनके बिना सफ़र तय करना शायद अब....... 
वो रहे जब हमारे साथ तो हमने 
उसे इतनी एहमियत नहीं दी 
उनके कहे बातों को सुन कर अनसुना कर दिया  
और आज जब वो नहीं रहे

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

अबकी होली में तो


होली के दिन दिल खिल जाते है रंगों में रंग मिल जाते है..... पुरे शोर से ये गाना बज रहा था, 
पुरे इलाके में सब के सब होली के  रंग में नहा के सराबोर थे ऐसा लग रहा था जैसे आज ही पूरी मस्ती का दिन है 
सारे दोस्त रंगों से लगे चेहरे में बड़े मस्त लग रहे थे 

गुरुवार, 8 मार्च 2012

आखिरी खत

प्रिय अनमोल,                                                                                   ८/3/२०१२ 
 माँ का ह्रदय तो ऐसे भी कोमल होता है  
                     आशा है कि आप सब लोग सकुशल होगे. आपको पत्र लिखे २०-२२ दिन हो गए. ये मेरी जिंदगी का आखिरी ख़त होगा. लिखना तो नहीं चाहती थी पर

गुरुवार, 1 मार्च 2012

हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया


हरे पत्तों  से बंधा ये  पेड़ 

इस पतझड़ में सूख कर हर पत्ता पत्ता
साथ छोड़ने को व्याकुल है 
जीवन की सच्चाई से सामना मेरा आज हो गया 
हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया

प्यार की दुनिया में ही नफरत मिलती है



""नफरतों का भी इक अलग एहसास है
जो लोगों को प्रेम के द्वार में लाता है""

प्यार की उम्मीद


मैं प्यार के लिए तो  एक सही व्यक्ति नहीं हूँ, 
पर नफरत के लिए भी नहीं
मैं हर किसी को समान रूप से प्यार करने की कोशिश करता हूँ

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

दर्द


 रवि 
दिल को इतना बड़ा करना कि हर दर्द  उसमे समां जाये
फिर प्यार की जगह नफरत की ये  कड़वाहट चुभन तुम्हे नहीं मिलेगा

किस से पूछोगे



एक एहसास 

फूलों की खुशबू में नहाया था तन मेरा
प्रफुलित हो कर  नया गीत गा रहा था

इक अमर प्रेम की दास्तान


अबकी पतझड़ शायद हम भी उजड़ेंगे 
आपकी वो तेज़ हवाओं में 
उन पत्तों की तरह 
जो बिखरे है हर बागों के ढेर में

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

इश्क का गीत

इश्क है तो फिर समझ लो वो तो......
प्रेम की वो बहार जिसे लोग इश्क कहते है खुशनसीव है वो जो इनके ऊंचाई को जानते है