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सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

इश्क का गीत

इश्क है तो फिर समझ लो वो तो......
प्रेम की वो बहार जिसे लोग इश्क कहते है खुशनसीव है वो जो इनके ऊंचाई को जानते है 



शिकायत की इस दुनिया में अपने आप मन  को गुलाम बनाये रखना की हम प्रेमी  है उस दिल के जो  आजादी की जिंदगी पसंद करते हो मुबारक हो इस उलझन में कि रुबारु  होकर भी अजनबी कहलाते है.....
एक एहसास.....

 साथ में बिताये जिंदगी के वो हसीं पल हमेशा याद आयंगे पर साथ में हो तो हँसी क्या है ये नहीं जानते है हंस कर यूँ ही चले गए ये नहीं सोचे कि हालात का असर कितना हुआ है
हंस कर गुजर देंगे हम ये ज़िन्दगी का सफ़र,
वो ख़ुशी मुझे दे  दे जिसे लोग इश्क का गीत कहते है 

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