दुरियाँ बनाएँ तो नजदीकियाँ भी नजदीक आने को बेबस नजर आती है....
अधुरा तो कुछ भी नहीं होता अगर बनाये को कोई नहीं बिगाड़ता...
फैले आकाश में भी गहराई की गहरी सतह हो सकती है बेशक कोई इसमें खोजे तेरे
कदमों के निशान....
उड़ान तो जब चाहे कर सकते थे
पर ऊँचाई में भी गहराई खोज रहे थे...
Ravi Beck (Prem)
एक नया आसमान
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शनिवार, 27 जुलाई 2013
सोमवार, 24 जून 2013
है...
सागर कितना विशाल होता है कितनी ही नदी नाले बह कर इसके साथ मिल जाते है।
सागर तो मंजिल होती है इन नदियो की तो फिर ये युवक-युवती भी तो उम्र के बहाव
में मौसम के रुख की तरह बहने लगते है
मौसम का चक्र और नदियो का बहाव रूपी इनका जीवन हर ऋतू का मजा और अनुभव लेता है।
जन्म से मृत्यू तक सफ़र इन नदियो के सामान हर मुश्किलों और हालात का सामना
करते आगे बढ़ते जाता है।
गर्मी का मौसम के बाद वर्षा ऋतू फिर अगला ऋतू फिर अगला ... ये सिलसिला तो
चलता रहता है एक वर्ष का मौसम का हाल मानव के पुरे जीवन का एक सारांश की तरह
है।
बचपन की नटखट के बाद उम्र के बढ़ने के साथ इनका स्वभाव में अंतर आने लगता है
कुछ प्यार तो कुछ आकर्षण दिखाई देने लगता है शुरुआत तो आकर्षण से होती है
पढाई लिखाई लोगों से मिलना जुलना बाते करना सीखना सिखाना ये उनके उज्वल जीवन
की कड़ी है
कुछ
बदलाव चाहते हुए विद्रोह कर जाते है तो कुछ पुरानी में है ढल जाते है कुछ सब
सह जाते है चुपचाप तो कुछ गलत को अपना लेते है
रही बातें उनके युवा अवस्था की तो ये शायद वर्षा ऋतू के सदृश है पानी का बहाव
कुछ ज्यादा ही होता है पूरी नदियाँ पानी से लबालब भर होती है
दोषारोपण युवा को चारो ओर से मिलता है पढाई से लेकर करियर सवारने तक का दवाव
ऐसा नहीं है कि युवा हर समय गलत हो और ये भी जरुरी नहीं की वो हमेशा सही हो।
हमारे जीवन का स्वभाव ही कुछ ऐसा है की हम वास्तविक बातें जल्दी नहीं फैलती
जितनी जल्दी अफवाह और बनवट की बातें फैलती है यद्यपि कुछ लोग जानते है की अमुक
मामला किस तरीके से शुरू हुआ लेकिन वे बिना टीका-टिप्पणी किये रह नहीं सकते
है मतलब युवा सही रहे या गलत दोषारोपण होता है
अब सवाल है कौन इन पर आरोप लगाता है।
बुजुर्ग लोग, माता पिता बच्चे सब या दोस्त ......
या वे खुद अपने आप पर लगते है
आज के तेज़ रफ़्तार की दुनिया में सब आगे निकल की कोशिश में अधिक से अधिक जानना
और पूर्ण जीवन का सुख लेने की सोच रखते है
शायद ये गलत भी हो और सही भी....
सागर तो मंजिल होती है इन नदियो की तो फिर ये युवक-युवती भी तो उम्र के बहाव
में मौसम के रुख की तरह बहने लगते है
मौसम का चक्र और नदियो का बहाव रूपी इनका जीवन हर ऋतू का मजा और अनुभव लेता है।
जन्म से मृत्यू तक सफ़र इन नदियो के सामान हर मुश्किलों और हालात का सामना
करते आगे बढ़ते जाता है।
गर्मी का मौसम के बाद वर्षा ऋतू फिर अगला ऋतू फिर अगला ... ये सिलसिला तो
चलता रहता है एक वर्ष का मौसम का हाल मानव के पुरे जीवन का एक सारांश की तरह
है।
बचपन की नटखट के बाद उम्र के बढ़ने के साथ इनका स्वभाव में अंतर आने लगता है
कुछ प्यार तो कुछ आकर्षण दिखाई देने लगता है शुरुआत तो आकर्षण से होती है
पढाई लिखाई लोगों से मिलना जुलना बाते करना सीखना सिखाना ये उनके उज्वल जीवन
की कड़ी है
कुछ
बदलाव चाहते हुए विद्रोह कर जाते है तो कुछ पुरानी में है ढल जाते है कुछ सब
सह जाते है चुपचाप तो कुछ गलत को अपना लेते है
रही बातें उनके युवा अवस्था की तो ये शायद वर्षा ऋतू के सदृश है पानी का बहाव
कुछ ज्यादा ही होता है पूरी नदियाँ पानी से लबालब भर होती है
दोषारोपण युवा को चारो ओर से मिलता है पढाई से लेकर करियर सवारने तक का दवाव
ऐसा नहीं है कि युवा हर समय गलत हो और ये भी जरुरी नहीं की वो हमेशा सही हो।
हमारे जीवन का स्वभाव ही कुछ ऐसा है की हम वास्तविक बातें जल्दी नहीं फैलती
जितनी जल्दी अफवाह और बनवट की बातें फैलती है यद्यपि कुछ लोग जानते है की अमुक
मामला किस तरीके से शुरू हुआ लेकिन वे बिना टीका-टिप्पणी किये रह नहीं सकते
है मतलब युवा सही रहे या गलत दोषारोपण होता है
अब सवाल है कौन इन पर आरोप लगाता है।
बुजुर्ग लोग, माता पिता बच्चे सब या दोस्त ......
या वे खुद अपने आप पर लगते है
आज के तेज़ रफ़्तार की दुनिया में सब आगे निकल की कोशिश में अधिक से अधिक जानना
और पूर्ण जीवन का सुख लेने की सोच रखते है
शायद ये गलत भी हो और सही भी....
रविवार, 23 जून 2013
काश!
अपने मन में विश्वास को ह्रदय की गहराई से समझ पाते
काश!
टुटते जुड़ते रिश्तों को बंद आँखों से भी जोड़ जाते
काश!
टुटते जुड़ते रिश्तों को बंद आँखों से भी जोड़ जाते
रविवार, 24 फ़रवरी 2013
मैं भी बदल...
अतीत की बातें और भविष्य की कल्पनाओं में डूबा शामो सवेरे
इस कदर खोया रहा मानो जीवन सिर्फ गमो से भरा हो
रास्ते में मैं जब उसके चेहरे के भाव पढने की चेष्टा करता हूँ
तो आत्म ग्लानी के भाव दीख पड़ते है
शहर में बस अब उनकी यादें ही रह गई है
कितनी ख़ुशी से गुजर रहे थे वो दिन आज बस यादें ही है
मिल कर तो कितनी प्रसन्नता होती है लेकिन साथ बिताये पलों की याद कर
आंखें बस नम हो जाती है कितनी नजदीकियां हुआ करती थी, बातों का सिलसिला
थमने का नाम नहीं लेती थी
समय के साथ हालात और लोग भी बदल जाते है तो मैं क्या चीज़ था मैं भी
बदल......///w\\\
इस कदर खोया रहा मानो जीवन सिर्फ गमो से भरा हो
रास्ते में मैं जब उसके चेहरे के भाव पढने की चेष्टा करता हूँ
तो आत्म ग्लानी के भाव दीख पड़ते है
शहर में बस अब उनकी यादें ही रह गई है
कितनी ख़ुशी से गुजर रहे थे वो दिन आज बस यादें ही है
मिल कर तो कितनी प्रसन्नता होती है लेकिन साथ बिताये पलों की याद कर
आंखें बस नम हो जाती है कितनी नजदीकियां हुआ करती थी, बातों का सिलसिला
थमने का नाम नहीं लेती थी
समय के साथ हालात और लोग भी बदल जाते है तो मैं क्या चीज़ था मैं भी
बदल......///w\\\
रविवार, 10 फ़रवरी 2013
आधी बातें..
कितना बदल गया रे आज समाज
भाग दौड़ और आगे रहने की रेस में सब है आगे...
पर कौन पिछड़ गया रे आज...?
इस इंसान को इंसान ने ही हरा दिया
जो इंसान होके भी इंसानियत की सोच तक को भूला गया
आज की ये जिन्दगी कल की उधार है
तो फिर क्यों ना हम एक बार
कल की जिन्दगी के बारे में सोच लें...
बहते खुशी के लम्हों में
क्यों ना हम अपनों के दुःखों को भी आज बहा दें...
आपसी प्यार-मिलाप और सहयोग से
क्यों ना हम बैर- घृणा और कपट को आज मिटा देँ...
छूट रहे हाथों को मजबूती से पकड़ क्योँ ना.....
आधी बातें....
क्योँ ना पूरी करें .....
Location:
Ranchi, Jharkhand, India
मंगलवार, 8 जनवरी 2013
"हम ऊँचे उठें और सफलता के शिखर पर पहुंचे।
सफलता एक ऐसी
चीज़ है जिसे हर व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है।
भले ही वह छोटे-छोटे कार्यों में ही
क्यों न हो।
| मैं सोचता हूँ की सौ में नब्बे ऐसे लोग है जो अपनी वाणी में वो मिठास शुद्धता नहीं ला सकते है जो एक सचरित्र व्यक्ति में देखने को मिलते है। |
जिसके
मन में हर समय नए विचार जन्म लेते है वह व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है।
हर मनुष्य का जन्म किसी विशिष्ट कार्य के लिए हुआ है। प्रत्येक
मनुष्य के अन्दर एक दिव्य शक्ति छिपी होती है लेकिन स्वयं वह उसे पहचान नहीं पाता है। बरगद का विशाल वृक्ष बरगद के लघु बीज से ही जन्म लेता है। हम अपने लकीर
के फ़क़ीर रहेंगे तो शायद हम कभी उन्नति
नहीं कर पाएंगे।
दुनिया में किसी भी सफल मनुष्य को देखिये वे दूसरों की नक़ल कर
महान नहीं बने,लेकिन उन्होंने स्वयं अपने लिए नए मार्ग का निर्माण किया। लेकिन
अपने बनाये मार्ग पर चलने के लिए अदम्य साहस की जरुरत है। उन्नति करने वाले
प्रत्येक के चरित्र में दो मौलिक गुण
अवश्य होते है - "निर्भयता और नवीनता।" जो पुरानी चीजों, रीतियों, विचारों पद्धतियों से बंधे रहते है , जो अंधविश्वास के
गुलाम होते है, जो डरते है कि कहीं उनका समर्थन कम न हो
जाये, कहीं उनके मतदाता उनके विरुद्ध न हो जाये, वे कभी भी पुराने रिवाज़ को तोड़ने में समर्थ नहीं होते।
Location:
Ranchi, Jharkhand, India
शनिवार, 5 जनवरी 2013
शिकायत नहीं हमें तो
मुझे तो शांति की तलाश थी...
सो अपने बनाये इस बेगानेपन में, बदलते वक़्त और परिवेश में
अपने मन की ख़ुशी की तलाश करते-करते....
आज अपनों की दूरी और नजदीकियों का कुछ ज्यादा ही तड़प महसूस हो रही है
मेरी आज की बातें कल की होती जा रही है
शिकायत नहीं हमें तो किसी से
क्योंकि मेरी जिम्मेदारियाँ आज भी जिम्मेदारी निभाने को तरसती रह जाती है
फिर भी ना जाने क्यों लोग आज भी राहों के रोड़े बन जाते है....?
बुधवार, 3 अक्टूबर 2012
सोच किस तेज़ी से बढ़ रही है
Location:
राँची, झारखण्ड, भारत
गुरुवार, 16 अगस्त 2012
प्यारा है मिलन
प्यारा-सा है मिलन
मिलने पर भी लगता है
मिलन अभी आधा अधूरा है
बुलाये हो मिलने को पर
जब मिल जाते हो तुम
लौटने का वक़्त भी भूल जाते है हम
बुधवार, 1 अगस्त 2012
बुधवार, 11 जुलाई 2012
गुरुवार, 31 मई 2012
बुधवार, 21 मार्च 2012
शुक्रवार, 9 मार्च 2012
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