प्रायः हम सोचते है कि कौन हमसे प्यार या प्रेम करता है।
अकसर हम इसलिए परेशान रहते है कि
दूसरे हमारी इज्जत नहीं करते,
हमसे प्यार नहीं करते हमें महत्व नहीं देते।
हम इन्ही लोगों को अपने ख्यालों में इतना महत्व दे देते है
कि अपना खुद का व्यक्तित्व भी धूमिल कर बैठते है।
हम खुद दूसरों से प्यार करना भूल जाते है
संतुष्ट क्यों नहीं रहते ।
अगर हम संतुष्ट रहे तो ये सारी शिकायते अपने आप समाप्त हो जाएगी।
मेरी नजर में संतोष या संतुष्टि मनुष्य सबसे बड़ा गुण है बाकी सारे गुण इसी बदौलत है।
अगर दुनिया में अमन-चैन कायम करना हो तो सभी को इस गुण को अपनाना होगा।
नये करने की सोच लालसा भी इसी के साथ शुरू होती है।
विज्ञान की दुनिया इसे कभी नहीं अपनाना चाहेगी पर विज्ञान ने जितने सुविधा दिए है उतने ही परेशानियाँ भी पैदा हुई है। अगर हम असंतुष्ट होकर विज्ञान की परेशानियों को ही देखेंगे तो
इसके लाभ को कभी प्राप्त नहीं कर पाएंगे .........
santosh ko to vaise bhi param sukh kaha gaya hai.aur vigyan ke liye yahi sahi hai-
जवाब देंहटाएं''science is a good servant but a bad master."
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isse comment hone me hone vala vilamb samapt ho jayega..