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शुक्रवार, 20 मई 2011

पिया मिलन की रात





रोशन हुआ है ये जग
जब बीत गये
पिया मिलन की रात,
हर गम बदल गए
खुशी के सितारों  में ,
अब ये मुमकिन हुआ,
सारा ये जग अपना हुआ,
पिया मिलन की ये रात
जब बीत गये....


कल तक जो अपना था
कैसे हो गया पल में  पराया,
ये पिया मिलन तो
भुलवा दिये सारे साथ,
चंचल मन में  जैसे
समाया था ये सपना,
कैसे पल में  ये सपना
...अपना...
पुरा हुआ,
छु जाए तन मन में  ,
सिरहन सी उठे
मेरा रोम रोम
जैसे खिल उठे,
जब याद आए
वो पिया मिलन की
पहली रात,
ओ पिया मिलन की रात....


मौसम का रंग क्या,
अपने गम क्या,
लाज शर्म क्या
सारे बीते समय की बात लगे,
होश में    है या बेहोश है हम,
अपने दिल के सारे उलझन
जैसे ये पैराये लगे
जब आयी थी पिया मिलन की रात...













             

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