सागर कितना विशाल होता है कितनी ही नदी नाले बह कर इसके साथ मिल जाते है।
सागर तो मंजिल होती है इन नदियो की तो फिर ये युवक-युवती भी तो उम्र के बहाव
में मौसम के रुख की तरह बहने लगते है
मौसम का चक्र और नदियो का बहाव रूपी इनका जीवन हर ऋतू का मजा और अनुभव लेता है।
जन्म से मृत्यू तक सफ़र इन नदियो के सामान हर मुश्किलों और हालात का सामना
करते आगे बढ़ते जाता है।
गर्मी का मौसम के बाद वर्षा ऋतू फिर अगला ऋतू फिर अगला ... ये सिलसिला तो
चलता रहता है एक वर्ष का मौसम का हाल मानव के पुरे जीवन का एक सारांश की तरह
है।
बचपन की नटखट के बाद उम्र के बढ़ने के साथ इनका स्वभाव में अंतर आने लगता है
कुछ प्यार तो कुछ आकर्षण दिखाई देने लगता है शुरुआत तो आकर्षण से होती है
पढाई लिखाई लोगों से मिलना जुलना बाते करना सीखना सिखाना ये उनके उज्वल जीवन
की कड़ी है
कुछ
बदलाव चाहते हुए विद्रोह कर जाते है तो कुछ पुरानी में है ढल जाते है कुछ सब
सह जाते है चुपचाप तो कुछ गलत को अपना लेते है
रही बातें उनके युवा अवस्था की तो ये शायद वर्षा ऋतू के सदृश है पानी का बहाव
कुछ ज्यादा ही होता है पूरी नदियाँ पानी से लबालब भर होती है
दोषारोपण युवा को चारो ओर से मिलता है पढाई से लेकर करियर सवारने तक का दवाव
ऐसा नहीं है कि युवा हर समय गलत हो और ये भी जरुरी नहीं की वो हमेशा सही हो।
हमारे जीवन का स्वभाव ही कुछ ऐसा है की हम वास्तविक बातें जल्दी नहीं फैलती
जितनी जल्दी अफवाह और बनवट की बातें फैलती है यद्यपि कुछ लोग जानते है की अमुक
मामला किस तरीके से शुरू हुआ लेकिन वे बिना टीका-टिप्पणी किये रह नहीं सकते
है मतलब युवा सही रहे या गलत दोषारोपण होता है
अब सवाल है कौन इन पर आरोप लगाता है।
बुजुर्ग लोग, माता पिता बच्चे सब या दोस्त ......
या वे खुद अपने आप पर लगते है
आज के तेज़ रफ़्तार की दुनिया में सब आगे निकल की कोशिश में अधिक से अधिक जानना
और पूर्ण जीवन का सुख लेने की सोच रखते है
शायद ये गलत भी हो और सही भी....
यह ब्लॉग खोजें
सोमवार, 24 जून 2013
रविवार, 23 जून 2013
काश!
अपने मन में विश्वास को ह्रदय की गहराई से समझ पाते
काश!
टुटते जुड़ते रिश्तों को बंद आँखों से भी जोड़ जाते
काश!
टुटते जुड़ते रिश्तों को बंद आँखों से भी जोड़ जाते
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)