भोली सुरत पर! मुरझाए से चेहरे लिए आँखों में दर्द के बिताए पलों के नमी लिए गँदे पुराने कपड़े में एक नन्ही सी जिन्दगी आशा से हाथों को फैलाए कि कुछ मिल जाए, स्टेशन पर इधर - उधर घूम रही थी
पास आने पर 5 का सिक्का देने पर माँ से भी बड़ी बड़ी आर्शीवाद के वचनों की बोली बोल कर आगे बढ़ गयी.....