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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

"हम ऊँचे उठें और सफलता के शिखर पर पहुंचे।




सफलता एक ऐसी चीज़ है जिसे हर व्यक्ति प्राप्त करना चाहता है।
भले ही वह  छोटे-छोटे कार्यों में ही क्यों न हो।
मैं सोचता हूँ की सौ में नब्बे ऐसे लोग है
जो अपनी वाणी में वो मिठास शुद्धता नहीं ला सकते है
जो एक सचरित्र व्यक्ति में देखने को मिलते है।
जिसके मन में हर समय नए विचार जन्म लेते है वह व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है।


हर मनुष्य का जन्म किसी विशिष्ट कार्य के लिए हुआ है। प्रत्येक मनुष्य के अन्दर एक दिव्य शक्ति छिपी होती है लेकिन स्वयं वह उसे पहचान नहीं पाता है। बरगद का विशाल वृक्ष बरगद के लघु बीज से ही जन्म लेता है। हम अपने लकीर के फ़क़ीर रहेंगे तो शायद  हम कभी उन्नति नहीं कर पाएंगे। 

दुनिया में किसी भी सफल मनुष्य को देखिये वे दूसरों की नक़ल कर महान नहीं बने,लेकिन उन्होंने स्वयं अपने लिए नए मार्ग का निर्माण किया। लेकिन अपने बनाये मार्ग पर चलने के लिए अदम्य साहस की जरुरत है। उन्नति करने वाले प्रत्येक के चरित्र में दो  मौलिक गुण अवश्य होते है - "निर्भयता और नवीनता।" जो पुरानी चीजों, रीतियों, विचारों पद्धतियों से बंधे रहते है , जो अंधविश्वास के गुलाम होते है, जो डरते है कि कहीं  उनका समर्थन कम न हो जाये, कहीं उनके मतदाता उनके विरुद्ध न हो जाये, वे कभी भी  पुराने रिवाज़ को तोड़ने में समर्थ नहीं होते।

    

शनिवार, 5 जनवरी 2013

शिकायत नहीं हमें तो


मुझे तो शांति की तलाश थी...
सो अपने बनाये इस बेगानेपन में, 
बदलते वक़्त और परिवेश में 
अपने मन की ख़ुशी की तलाश करते-करते.... 
आज अपनों की दूरी और नजदीकियों का कुछ ज्यादा ही तड़प महसूस हो रही है 
मेरी आज की बातें कल की होती जा रही है
शिकायत नहीं हमें तो किसी से 
क्योंकि मेरी जिम्मेदारियाँ आज भी जिम्मेदारी निभाने को तरसती रह जाती है 
फिर भी ना जाने क्यों लोग आज भी राहों के रोड़े बन जाते है....?