ऐसे क्यों हो एकाकी बन कर
आ कर जुड़ जाओ इस जहाँ के साथ
आप की मंजिल बाहें फैली कर खड़ी है
आ कर जुड़ जाओ इस पथ पर
चाहे कितनी भी परेशानियाँ
दिक्कते आए आपके मंजिल
तक पहुँचने में
फिर भी जुड़ जाओ
इसे हासिल करने में
होंगे कामयाब अपने में
हमेशा ये विश्वास रखकर
उम्मीद की आखिरी किरण
के बुझने तक कोशिश करना
हर वो मंजिल जो आप चाहती है
आपकी कदम चुमेगी।
जुड़ जाओ हर मंजिल को चुमने में
वक्त के साथ हालात बदल जाते है
जुड़ जाओ इसे बदलने में
मैं मेहनत करूँगी ये सोच कर
जुड़ जाओ मेहनत करने में
जीत जाएंगे हम ये सोच के
जुड़ जाओ जीतने में
साथ मिलेगा ये सोच कर
जुड़ जाओ प्रेम करने में
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