खिलती बहारों के मौसम में
मन क्यों आज बहक रहा है
उनके आने से
इस बिराने में
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| उनके आने से |
मेरी जिंदगानी में
रूठी हवाओं में
फूलों के सुगंध में
बंद हुए किताबों में
छलकते हुए निगाहों में
गुम होती बहारों में
छुते मन की गुदगुदाहट में
बहकते मौसम में
गरजते बादलों में
बरसते बारिश की बूंदों में
सुबह के उगते सूरज में
खुले अम्बर में
सागर की लहरों में
कल- कल करती हुए नदियों के धाराओं में
सुनसान राहों में
छुपे चाँद की चांदनी में
अंधरे में रोते जुगनू की आवाज़ों में
सूनी पड़ी राहों में
मन क्यों आज बहक रहा है

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