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बुधवार, 11 जुलाई 2012

उनके आने से


खिलती बहारों  के  मौसम में  
मन क्यों आज बहक रहा है
उनके आने से 
इस बिराने में
उनके आने से
दिल के कोने में
मेरी जिंदगानी में
रूठी हवाओं में
फूलों के सुगंध में
बंद हुए किताबों में
छलकते हुए निगाहों में
गुम होती बहारों में
छुते मन की गुदगुदाहट में
बहकते मौसम में
गरजते बादलों में
बरसते बारिश की बूंदों में
सुबह के उगते सूरज में
खुले अम्बर में
सागर की लहरों में
कल- कल करती हुए नदियों के धाराओं में
सुनसान राहों में
छुपे चाँद की चांदनी में
अंधरे में रोते जुगनू की  आवाज़ों में
सूनी पड़ी राहों में 
मन क्यों आज बहक रहा है


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