दुरियाँ बनाएँ तो नजदीकियाँ भी नजदीक आने को बेबस नजर आती है....
अधुरा तो कुछ भी नहीं होता अगर बनाये को कोई नहीं बिगाड़ता...
फैले आकाश में भी गहराई की गहरी सतह हो सकती है बेशक कोई इसमें खोजे तेरे
कदमों के निशान....
उड़ान तो जब चाहे कर सकते थे
पर ऊँचाई में भी गहराई खोज रहे थे...
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