खामोश सुनसान राहों पे
जब छंटी मदहोशियाँ मुहाब्बत की
तो हसरत और हकीकत दोनों ख्याब पाया,
आँखों में आंसु थे खुशी के
मगर जब याद आए तो आँखों में सैलाब पाया,
खोजने लगा जब मैं अपने दिल को
तो उसे आज भी तेरे आस पास पाया,
एहसास तो एहसास है
जो मुझ से मिले
विश्वास है कि वो भी मुझे कभी ना भुले....
तेरी याद आती है........
sundar bhavabhivyakti
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