| एक एहसास |
फूलों की खुशबू में नहाया था तन मेरा
मिलन की यह बेला रिश्तों में
ना जाने क्या नया खेल खेलेगी
किसको खबर थी
मदहोश करने वोले ये सुगंध न जाने कहाँ तक बिखरेगी
कागज़ की कश्ती का वो खेल
बलखाती लहरों में वो तूफानों का मेल
वो मेरा दिल
डूबते कश्ती और वो एक तिनका का सहारा
इस मिलन का दोष क्या था किस से पूछोगे ....
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