यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

किस से पूछोगे



एक एहसास 

फूलों की खुशबू में नहाया था तन मेरा
प्रफुलित हो कर  नया गीत गा रहा था
मिलन की यह बेला रिश्तों में 
ना जाने क्या नया खेल खेलेगी
किसको खबर थी
मदहोश करने वोले ये सुगंध न जाने कहाँ तक बिखरेगी

कागज़ की कश्ती का वो खेल 
बलखाती लहरों में वो तूफानों का मेल 

वो मेरा दिल 
डूबते कश्ती और वो  एक तिनका का सहारा 
इस मिलन का  दोष क्या था किस से पूछोगे ....




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें