यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

दर्द


 रवि 
दिल को इतना बड़ा करना कि हर दर्द  उसमे समां जाये
फिर प्यार की जगह नफरत की ये  कड़वाहट चुभन तुम्हे नहीं मिलेगा


जीवन की  धारा में बहते जाना वो मेरी मन की जमुना
मंजिल  पहुचने का सुख क्या है ?
इन बहती लहरों  से पूछना
हर ख़ुशी में खुश पर दुःख में ना रोना
मेरे मन की वो रंगीन दर्पण
दर्द क्या है?
दीवारों में सजे चोट से उभरे दरार हुए कांच से पूछना
बस !!!!!
"ज़िन्दगी में कोई भी  दर्द हो,
अगर उससे घबराओगे 
उससे बचने की कोशिश करोगे 
तो परेशानी बढ़ जायगी 
लेकिन अगर उसमे आप रम जाओगे
दर्द को आनंद के रूप में देखने लगोगे
डटकर उसका सामना करोगे 
तो दर्द अपने आप दूर हो जायेगा" 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें