मुझे तो शांति की तलाश थी...
सो अपने बनाये इस बेगानेपन में, बदलते वक़्त और परिवेश में
अपने मन की ख़ुशी की तलाश करते-करते....
आज अपनों की दूरी और नजदीकियों का कुछ ज्यादा ही तड़प महसूस हो रही है
मेरी आज की बातें कल की होती जा रही है
शिकायत नहीं हमें तो किसी से
क्योंकि मेरी जिम्मेदारियाँ आज भी जिम्मेदारी निभाने को तरसती रह जाती है
फिर भी ना जाने क्यों लोग आज भी राहों के रोड़े बन जाते है....?
उम्दा विचार |
जवाब देंहटाएंआशा