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बुधवार, 21 मार्च 2012

उनका साथ


जीवन की राह पे उनके बिना सफ़र तय करना शायद अब....... 
वो रहे जब हमारे साथ तो हमने 
उसे इतनी एहमियत नहीं दी 
उनके कहे बातों को सुन कर अनसुना कर दिया  
और आज जब वो नहीं रहे
तो जैसे सारा जग उसके बगैर सुना सुना लग रहा है
उनके कमी का एहसास हो रहा है 
उनके बातों को सुनने का मन  कर रहा है
उनको देखने का मन कर रहा है 
उनसे मिलने का मन कर रहा है
हर दिन की सुबह उनके दर्शन करने को मन उतावला हो रहा है
सुबह की पहली किरण जैसे ही हमारे तन को स्पर्श करती है तो लगता है 
आज फिर एक दिन बीत गया उसके बगैर 

हम अक्सर क्यों उन लोगों को कभी-कभी इतनी एहमियत नहीं देते 
जो हमारे साथ रहते, साथ खाते-पीते हमारे जीवन की अहम हिस्से होते है 



सुबह होते ही  भागदौड़ की जिंदगी में व्यस्त हो जाते है  
हाल चाल पूछने का  भी वक़्त नहीं रहता है 
अपने हो कर भी साथ रहने वालों की बात तक सुनने का मन नहीं करता पर......
पर जब वही  हमसे रूठ कर चले जाये तो बस उसी की कमी खलती है  
उनकी याद में जीवन की  दिनचर्या पूरी तरह से गड़बड़ा जाती है 
मन क्यों इतना उदास हो जाता है, सारा जग सुना-सुना लगता है 





जैसे हमसे सारा जग रूठ गया हो 
हर ओर उसे खोजती रहती है निगाहें, 
बस उनकी ही राह देखती है
आँखों की ये आस जाने कब ख़त्म होगी

जीवन की राह पे उनके बिना सफ़र तय करना शायद अब......


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