
होली के दिन दिल खिल जाते है रंगों में रंग मिल जाते है..... पुरे शोर से ये गाना बज रहा था,
पुरे इलाके में सब के सब होली के रंग में नहा के सराबोर थे ऐसा लग रहा था जैसे आज ही पूरी मस्ती का दिन है
पास्काकाल होने के कारण मैं तो होली नहीं खेल सका मेरे दोस्तों को पता है कि मैं पास्का काल होने के कारण रंग से दूर हूँ सो वे आ कर होली की बधाई दिए आपस में गले मिले और फिर मेरे दोस्तों की टोली उधम मचाते आगे बढ़ गए उन्होंने मेरी भावनाओं का कदर किया इससे अच्छी होली और क्या हो सकती है अपने सारे दोस्तों को
होली की बधाई और शुक्रिया.
ऐसे भाईचारे से खेले गई होली बड़ी प्यारी और सुन्दर लगती है
पर शरारत तो होली की खास पहचान है
मेरे पड़ोस में संजू और उनकी साली की शरारत वाली होली भी मैंने देखी है
सच कहूँ तो बड़ा अच्छा लगता है
होली की हर अदा यादगार होती है
मस्त है
और
अबकी होली में तो बस
होली का रंग से लेकर भंग तक
पिचकारी से लेकर बाल्टी तक
पिचकारी से लेकर बाल्टी तक
अबीर से लेकर गुलाल तक
हरे से लेकर लाल तक ,
पीला से लेकर नीला तक
बच्चे से लेकर बूढ़े तक ,
पिताजी से लेकर माताजी तक,
चाचा से लेकर चाची तक
भैया से लेकर भाभी तक
जीजा से लेकर साली तक
मुन्ना से लेकर मुन्नी तक
लड़का से लेकर लड़की तक
शरीफ से लेकर बदमाश तक
बुराई से लेकर अच्छाई तक
शरारत से लेकर दीवानगी तक
मन से लेकर तन तक
आगे से लेकर पीछे तक
ऊपर से लेकर नीचे तक
झोपडी से लेकर महल तक
राजा से लेकर रंक तक
आमिर से लेकर गरीब तक ,
अजय से लेकर विजय तक
लता से लेकर मधु तक
स्वीटी से लेकर डौगी तक
हार से लेकर जीत तक
प्यार से लेकर तकरार तक
मिलन से लेकर ......
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...............................बुरा ना मानो.................................
............................................. सब होली है................................................
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