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गुरुवार, 1 मार्च 2012

हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया


हरे पत्तों  से बंधा ये  पेड़ 

इस पतझड़ में सूख कर हर पत्ता पत्ता
साथ छोड़ने को व्याकुल है 
जीवन की सच्चाई से सामना मेरा आज हो गया 
हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया



कुछ हमसफ़र बीच राह में ही साथ छोड़ जाते है 
पर जिससे  उम्मीद ज्यादा  वो ही ऐसा क्यों कर जाते है
..
साथ था उनका, पर कहाँ तक?
उम्र भर का ये रिश्ता आज क्यों पराया सा लग रहा है..हर गम में साथ निभाने की कसमें वादे करने वाले
हालात के आगे कहाँ गुम हो जाते है 
अब  तो हताश निराश, ये अतीत की बात रह गई 
हमें तो अब  ग़मों में रहने की आदत हो गई है 

ये कुछ अजीब सा एहसास था 


किस मौसम में किस परिधान को पहनना उपयुक्त है  
 इन तेजी से बहती  हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया...





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