इस पतझड़ में सूख कर हर पत्ता पत्ता
साथ छोड़ने को व्याकुल है
जीवन की सच्चाई से सामना मेरा आज हो गया
| हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया |
कुछ हमसफ़र बीच राह में ही साथ छोड़ जाते है
पर जिससे उम्मीद ज्यादा वो ही ऐसा क्यों कर जाते है
..
साथ था उनका, पर कहाँ तक?
उम्र भर का ये रिश्ता आज क्यों पराया सा लग रहा है..हर गम में साथ निभाने की कसमें वादे करने वाले
हालात के आगे कहाँ गुम हो जाते है
अब तो हताश निराश, ये अतीत की बात रह गई
हमें तो अब ग़मों में रहने की आदत हो गई है
ये कुछ अजीब सा एहसास था
किस मौसम में किस परिधान को पहनना उपयुक्त है
इन तेजी से बहती हवाओं ने मुझे आज सिखा दिया...
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